दुनिया का 8वां महाद्वीप है- ज़ीलैंडिया।

बात सन 1642 का है जब ‘एबेल टैस्मैन’ (Abel Tasman) नामक डच नाविक एक मिशन पर निकला था जिसकी चर्चा BBC ने अपने एक लेख में किया था। एबेल टैस्मैन एक कुशल नाविक था। एबेल टैस्मेन को यकीन था कि पृथ्वी के दक्षिणी गोलार्ध में एक बड़ा सा महाद्वीप है। जैसा की सभी जानते हैं कि यूरोप के लोगों को पृथ्वी का दक्षिणी गोलार्ध 17वीं शताब्दी के मध्य में भी रहस्य का विषय था। गौरतलब है कि उन्हें यकीन था कि यूरोप जैसे बड़े भू भाग की तरह ही पृथ्वी के दक्षिण भी धरती का बड़ा सा हिस्सा होगा। प्राचीन रोम में इस भू भाग को पहले Terra Australis नाम से जाना जाता था। एबेल टैस्मैन इस महाद्वीप‘ को खोजने निकला लेकिन वो न्यूज़ीलैंड पहुंचा। स्थानी माओरी लोगों से यूरोपियन्स की मुलाकात अच्छी नहीं रही। टैस्मैन धरती पर उतरे बिना ही वापस लौट पड़ा। वो वापस खोज जारी रखने के लिए भी नहीं लौटा। यूरोप के लोगों ने ये मान लिया कि जिस स्थान पर टैस्मैन पहुंचा था वो लेजेंड्री Terra Australis नहीं है।

ख़ोज के अनुसार 2017 में जियोलॉजिस्ट्स के एक समूह की चर्चा दुनियाभर में होने लगी थी। इस समूह ने ज़ीलैंडिया‘ की खोज कर ली। 1.89 मिलियन स्क्वेयर माइल्स का ये महाद्वीप दुनिया का 8वां महाद्वीप था। ज़ीलैंडिया का 94% भाग महासागर के नीचे है। इसके कुछ ही द्वीप समुद्री सतह के ऊपर हैंजैसे- न्यूज़ीलैंड। ज़ीलैंडिया प्रशांत महासागर के दक्षिण में 3500 फीट की गहराई पर है। इस भू भाग को महाद्वीप घोषित किया जाना चाहिए या नहींइस पर काफ़ी सालों से बहस हो रही है। एक महाद्वीप कहलाने के लिए जितने भी मापदंड है ज़ीलैंडिया उन पर सब पर खरा उतरता है। फिर समस्या कहां आ रही हैसमस्या यही है कि इस महाद्वीप का ज्यादातर हिस्सा पानी के नीचे है। ज़ीलैंडिया से जो प्राचीन पत्थरों और क्रस्ट के सैम्पल लिए गए हैं वो 500 मिलियन साल पुराने हैंजबकि अन्य महाद्वीपों में पत्थर और क्रस्ट सैम्पल 1 बिलियन सालों से ज़्यादा पुराने हैं। ज़ीलैंडिया पर अभी भी शोध जारी है। इस सवाल का भी जवाब नहीं मिला है कि ये पानी के नीचे कब और क्यों डूबाइस विषय में भी कोई जानकारी नहीं है कि इस महाद्वीप पर कौन रहता थाडायनासोर या कोई अन्य जीव?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *