भारत अमेरिका के बढ़ते कदम।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहली बार अमेरिका के राजकीय दौरे पर पहुंचे हैं। वे यहां 72 घंटे रहेंगे तथा 12 से ज्यादा आयोजनों में हिस्सा लेंगे। इस दौरान दोनों देशों के बीच सुरक्षाऊर्जा और विनिर्माण के सेक्टर में अहम डील हो सकती है। पेंटागन के एक सीनियर अफसर ने कहा, ‘जब आप फाइनल डिफेंस एग्रीमेंट देखेंगे तो नाटो देशों जैसे रक्षा सौदे दिखेंगे। जैसे अमेरिका-ब्रिटेन नजदीकी सहयोगी हैंवैसे ही रिश्ते भारत के साथ होने जा रहे हैं’। पीएम मोदी की इस यात्रा के बाद भारत की छवि चीन के असर को कम करने के लिए अमेरिका के सबसे बड़े पार्टनर के तौर पर उभर सकती है। व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव काराइन जीन-पियरे ने कहा, ‘यह यात्रा मुक्तसमृद्ध और सुरक्षित हिंद-प्रशांत के लिए दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धतास्वच्छ ऊर्जा व टेक्नोलॉजी की साझेदारी बढ़ाने के संकल्प को मजबूत करेगी।

वहीँ, भारतवंशियों की नजर में मोदी का यह दौरा कई अर्थों में मील का पत्थर साबित होगा। कुछ की नजर में इस दौरे में पूर्ण दोहरी नागरिकता व सांस्कृतिक सुरक्षा जैसे जरूरी मुद्दों पर सहमति हो सकती है। अमेरिका में 50 लाख भारतीय प्रवासी हैं और वे सभी एक इकोनोमिकलकल्चरल और पॉलिटिकल सुपर पावर बन कर देश का नाम रोशन कर रहे हैं। प्रवासियों के सबसे बड़े संगठन इंडिस्पोरा के सदस्य कहते हैं कि इमिग्रेशन-वीसाएजुकेशनटेक्नोलॉजी और डिफेंस जैसे सेक्टर में दोनों सरकारों में जुड़ाव बेहद जरूरी है। भारत सरकार को प्रवासियों को पूर्ण दोहरी नागरिकता देने पर विचार करना चाहिए। सिलिकॉन वैली में काम कर रहे युवाओं ने दोनों देशों के संबंधों में मधुरता को नई भू-राजनीतिक और भू-आर्थिक विश्व व्यवस्था बनाने में मददगार बताया। वहीँ, भारत एक महत्वपूर्ण राष्ट्र के रूप में उभरकर आने वाले कल में विश्व को नई राह दिखायेगा। वे उमिंद करते हैं कि बड़े बदलाव के लिए दोनों देशों को टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर में बढ़ना ही होगा।

अमेरिकी दौरे से पहले वॉल स्ट्रीट जर्नल को दिए इंटरव्यू में पीएम मोदी ने कहा कि भारत-अमेरिका के नेताओं में एक-दूसरे के प्रति अभूतपूर्व विश्वास पैदा हुआ है। चीन के साथ द्विपक्षीय संबंधों के लिए सीमा क्षेत्रों में शांति व स्थिरता जरूरी है। भारत संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान में विश्वास रखता है। प्रधानमंत्री मोदी ने रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर कहासभी देशों को अंतरराष्ट्रीय कानूनों व देशों की संप्रभुता का सम्मान करना चाहिए। विवादों का हल बातचीत से होना चाहिए। पूरी दुनिया के लिए आर्थिक विकासअनुकूल कारोबारी माहौल बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। नौकरशाही को कम करने और निवेश को बढ़ावा देने के उपाय करने चाहिए ताकि व्यवसाय फल-फूल सकें। मोदी जी ने इशारों-इशारों में चीन को संदेश देते हुए कहा कि अब भारत का समय आ चुका है।

नरेंद्र मोदी के दौरे की डिप्लोमैटिक और स्ट्रैटेजिक अहमियत

1.       भारत और अमेरिका के बीच 2022-2023 में बाइलेट्र्ल ट्रेड 128 बिलियन डॉलर पार कर चुका है। यानी इस दौरान भारत और अमेरिका ने 10 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का व्यापार किया। अमेरिका के साथ भारत का ट्रेड सरप्लस है। यानी भारत अमेरिका को ज्यादा सामान बेचता है और वहां से कम सामान खरीदता है। भारत इसे बरकरार रखना चाहता है।

2.       चीन के मुद्दे को लेकर भारत और अमेरिका की चिंता लगभग एक जैसी हैं। जहां भारत LAC और हिंद महासागर में चीन की दखलंदाजी का विरोध करता हैवहीं अमेरिका भी ताइवान और साउथ चाइना सी में चीन की घुसपैठ की कोशिशों का विरोध करता है। ऐसे में चीन से निपटने के लिए दोनों देशों को एक-दूसरे के साथ की जरूरत है।

3.       PM के इस दौरे पर भारत को दुनिया का सबसे एडवांस्ड MQ-9 ड्रोन और फाइटर जेट के इंजन बनाने की 11 टेक्नोलॉजीज मिलने की संभावना है।

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