दुनिया का कारखाना बनने के करीब है भारत।

ऐसा कयास लगाया जा रहा है कि अब भारत बहुत जल्द ही चीन के स्थान पर कारखानों का हब बनने जा रहा है। इस सन्दर्भ में महिंद्रा समूह के चेयरमैन आनंद महिंद्रा का कहना है कि भारत दुनिया के लिए कारखाने के रूप में चीन की जगह लेने में सक्षम होने के करीब है। हम इसका लाभ उठाने के लिए अच्छी स्थिति में हैं। पड़ोसी की महत्वाकांक्षाओं पर संदेह और कोरोना के बाद आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान ने भी देश के पक्ष में काम किया है। कंपनी की वार्षिक साधारण सभा में आनंद महिंद्रा ने कहाआज सारे कारकों को एकजुट करने की जरूरत है क्योंकिभारत लंबी छलांग लगाने को तैयार है। हम तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। जब कई देश मंदी की ओर बढ़ रहे हैंतब भारतीय अर्थव्यवस्था 7% की दर से बढ़ रही है। चीन के साथ तनाव कई निर्माताओं को भारत की ओर धकेल रहा है। विदेशी कंपनियों का रुख तेजी से भारत की ओर हो रहा है। कच्चे तेलों की कीमतें लगातार छठे हफ्ते तेजी में है। 

वहीं भारत कच्चा तेल रूस से ज्यादा आयात कर रहा है। हालिया यह 85 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। सऊदी अरब और रूस ने सितंबर तक उत्पादन में कटौती जारी रखने का फैसला लिया हैजिससे कीमतों में तेजी आ रही है। ब्रेंट की कीमत 43 सेंट बढ़कर 85.57 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। इस साल में यह पहली बार हैजब तेल की कीमतें लगातार छठे हफ्ते बढ़ी हैं। देश का विदेशी मुद्रा भंडार 28 जुलाई को समाप्त सप्ताह में तीन अरब डॉलर घटकर 603.87 अरब डॉलर पर आ गया है। आरबीआई ने बीते सप्ताह बताया कि यह लगातार दूसरा हफ्ता है जब भंडार में गिरावट आई है। आंकड़ों के मुताबिक21 जुलाई के हफ्ते में भंडार में 1.98 अरब डॉलर की गिरावट आई थी। अक्टूबर2021 में विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड 645 अरब डॉलर पर था। ये सब कुछ ऐसे कारण है जो बताते हैं कि भारत अब रुकने वाला नहीं है बल्कि यहाँ की अर्थव्यवस्था बहुत मजबूती से आगे बढ़ रही है और बहुत जल्द ही चीन का स्थान ले सकती है।

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