आरक्षण व्यवस्था में क्रीमी लेयर को लेकर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने सवाल उठाया कि यदि किसी परिवार के दोनों माता-पिता आईएएस अधिकारी हैं और सामाजिक व आर्थिक रूप से पूरी तरह सक्षम हैं, तो उनके बच्चों को आरक्षण का लाभ क्यों मिलना चाहिए। न्यायालय ने कहा कि आरक्षण का उद्देश्य समाज के पिछड़े और वंचित वर्गों को आगे लाना है, न कि उन परिवारों को लगातार लाभ देना जो पहले ही पर्याप्त सामाजिक और आर्थिक प्रगति कर चुके हैं।

सुनवाई के दौरान न्यायाधीशों ने कहा कि शिक्षा, आर्थिक सशक्तिकरण और सरकारी सेवाओं में उच्च पद प्राप्त करने से सामाजिक गतिशीलता बढ़ती है। ऐसे में यह विचार करना जरूरी है कि आरक्षण का लाभ वास्तव में जरूरतमंद लोगों तक पहुंचे। अदालत की यह टिप्पणी क्रीमी लेयर की परिभाषा और आरक्षण नीति की समीक्षा से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान आई।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अभी कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है, लेकिन उसकी टिप्पणियों ने आरक्षण व्यवस्था और क्रीमी लेयर की सीमा को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अदालत ने संकेत दिया कि आरक्षण का लाभ अनंत काल तक एक ही परिवार की पीढ़ियों को नहीं मिलना चाहिए और इसके मूल उद्देश्य को ध्यान में रखना आवश्यक है।