फुलपरास प्रखंड कार्यालय में मंत्री शीला मंडल की समीक्षा बैठक, जनप्रतिनिधियों की शिकायतों पर अधिकारियों की लगाई क्लास

फुलपरास, मधुबनी (संतोष कुमार) :- बिहार सरकार की  विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री शीला मंडल ने शनिवार को फुलपरास प्रखंड कार्यालय सभागार में विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की।

बैठक में क्षेत्र के विकास कार्यों, जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन तथा आम जनता की समस्याओं के समाधान को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।

बैठक में प्रखंड प्रमुख रामपुकार यादव, प्रखंड विकास पदाधिकारी अतुल कुमार सिंह, अंचलाधिकारी अजय चौधरी, प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी प्रगति कुमारी, प्रखंड कृषि पदाधिकारी सुमन कुमार, आपूर्ति पदाधिकारी जितेंद्र कुमार झा सहित विभिन्न विभागों के पदाधिकारी मौजूद रहे। इसके अलावा पंचायत समिति सदस्य, मुखिया एवं कई जनप्रतिनिधियों ने भी बैठक में भाग लिया।

समीक्षा बैठक के दौरान जनप्रतिनिधियों ने नल-जल योजना, विद्युत व्यवस्था, जन वितरण प्रणाली (PDS), आंगनबाड़ी सेवाओं, कृषि, प्रधानमंत्री आवास योजना, सड़क निर्माण, स्वास्थ्य सेवाओं समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया। जनप्रतिनिधियों ने विभिन्न योजनाओं में अनियमितता और लोगों को हो रही परेशानियों को लेकर खुलकर अपनी शिकायतें मंत्री के समक्ष रखीं।

शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए मंत्री शीला मंडल ने संबंधित अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई और जनहित से जुड़े मामलों में लापरवाही नहीं बरतने की चेतावनी दी। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि सरकार की सभी जनकल्याणकारी योजनाओं को बिना किसी बहाने और देरी के पूरी पारदर्शिता के साथ धरातल पर उतारा जाए, ताकि आम लोगों को उसका लाभ मिल सके।
मंत्री ने कहा कि योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की लापरवाही या शिकायत बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि भविष्य में शिकायतें प्राप्त होती हैं तो संबंधित पदाधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।

गौरतलब है कि मंत्री शीला मंडल ने 11 जून को घोघरडीहा प्रखंड, 12 जून को मधेपुर प्रखंड और 13 जून को फुलपरास प्रखंड में समीक्षा बैठक कर विकास कार्यों की स्थिति का जायजा लिया है। मंत्री के इस कदम की जहां आम लोगों द्वारा सराहना की जा रही है, वहीं कई लोगों का आरोप है कि प्रखंड कार्यालयों में बिना लेन-देन के कार्य नहीं होते हैं।

अब बड़ा सवाल यह है कि मंत्री की सख्ती और समीक्षा बैठकों के बाद क्या सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी जैसी समस्याओं पर अंकुश लग पाएगा, या फिर व्यवस्था पहले की तरह ही चलती रहेगी? आने वाले दिनों में इसका जवाब जनता को देखने को मिलेगा।

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